➤ लेजर, ड्रोन और लाइट शो के जरिए दुनिया को दिखाई हिमाचल की सांस्कृतिक विरासत
➤ क्रिकेट के साथ पर्यटन और हिमाचल की पहचान को भी मिला नया आयाम
➤ धर्मशाला स्टेडियम की वैश्विक लोकप्रियता से बढ़ा प्रदेश का गौरव
धर्मशाला का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम अब केवल खेल का मैदान नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश की संस्कृति, पर्यटन और पहचान का वैश्विक मंच बन चुका है। हाल ही में आयोजित अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मुकाबले के दौरान एचपीसीए ने लेजर शो, ड्रोन तकनीक, लाइट एंड साउंड प्रस्तुति के माध्यम से हिमाचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दुनिया भर के दर्शकों तक पहुंचाया।

धौलाधार पर्वतमाला की गोद में बसे इस खूबसूरत स्टेडियम ने एक बार फिर साबित कर दिया कि खेल आयोजन केवल प्रतियोगिता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि किसी क्षेत्र की संस्कृति और पर्यटन को भी नई पहचान दे सकते हैं। मैच के दौरान प्रस्तुत किए गए विशेष शो में देवभूमि हिमाचल, वीरों की गाथाएं, कुल्लू दशहरा, देवी-देवताओं की परंपरा, साहसिक खेल और वन्य जीवन की आकर्षक झलक दिखाई गई।

स्टेडियम में मौजूद हजारों दर्शकों ने इस प्रस्तुति का तालियों की गड़गड़ाहट से स्वागत किया। वहीं इसका सीधा प्रसारण दुनिया के कई देशों में होने से हिमाचल की संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता करोड़ों लोगों तक पहुंची।

वर्ष 2005 में जिस स्टेडियम की परिकल्पना की गई थी, वह आज प्रदेश की पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक बन चुका है। क्रिकेट प्रेमियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में पर्यटक भी केवल इस स्टेडियम और धौलाधार के अद्भुत दृश्य को देखने धर्मशाला पहुंचते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि धर्मशाला में आयोजित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मुकाबलों ने प्रदेश के पर्यटन उद्योग को नई गति दी है। होटल, परिवहन, स्थानीय व्यापार और पर्यटन गतिविधियों को इससे लगातार लाभ मिल रहा है।

हाल ही में विभिन्न वैश्विक रैंकिंग में भी धर्मशाला क्रिकेट स्टेडियम को दुनिया के सबसे खूबसूरत क्रिकेट मैदानों में शामिल किया गया है। इसकी लोकप्रियता के पीछे वर्षों की मेहनत, आधुनिक सुविधाएं और हिमाचल को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने का दूरदर्शी प्रयास माना जा रहा है।

आज धर्मशाला क्रिकेट स्टेडियम खेल, संस्कृति और पर्यटन के अद्भुत संगम के रूप में उभर चुका है, जो हिमाचल प्रदेश की पहचान को दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाने का काम कर रहा है।



